व्रत-त्योहार
पंचांग की लय में जीवन
हर व्रत-त्योहार केवल परंपरा नहीं, बल्कि ग्रहों व ऋतुओं के साथ तालमेल बिठाने का एक अवसर भी है। सटीक तिथि व मुहूर्त हेतु परामर्श लें, क्योंकि पंचांग तिथियां प्रतिवर्ष बदलती हैं।
वर्ष-चक्र के प्रमुख पर्व
चैत्र (मार्च-अप्रैल)
नवरात्रि व राम नवमी
शक्ति की उपासना का पर्व, नए संकल्प और नए कार्य आरंभ करने हेतु शुभ माना जाता है।
श्रावण (जुलाई-अगस्त)
सावन सोमवार
शिव आराधना का महीना, चंद्र व मानसिक शांति से जुड़े उपायों हेतु अनुकूल।
भाद्रपद (अगस्त-सितंबर)
जन्माष्टमी व गणेश चतुर्थी
बुध व गुरु से संबंधित बुद्धि व विवेक की उपासना का समय।
आश्विन (सितंबर-अक्टूबर)
शारदीय नवरात्रि व दशहरा
वर्ष की सबसे प्रमुख नवरात्रि, साधना व नए आरंभ हेतु सर्वाधिक शुभ अवधि।
कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर)
दीपावली व धनतेरस
लक्ष्मी पूजन का पर्व, धन व समृद्धि से जुड़े उपायों हेतु प्रमुख अवसर।
माघ (जनवरी-फरवरी)
मकर संक्रांति
सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व, सूर्य संबंधी उपायों हेतु शुभ आरंभ।
फाल्गुन (फरवरी-मार्च)
महाशिवरात्रि व होली
शिव आराधना व पुराने की विदाई कर नए वर्ष की तैयारी का समय।
सटीक मुहूर्त चाहिए?
विवाह, गृह-प्रवेश, नामकरण या किसी भी महत्वपूर्ण कार्य हेतु सटीक शुभ मुहूर्त आपकी व्यक्तिगत कुंडली देखकर ही बताया जाता है।